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हल्दी के फायदे, उपयोग और औषधीय गुण।Benefits, uses and medicinal properties of turmeric.

 हल्दी Haldi  हमारी सांस्कृतिक विरासत है। सदियों से इसका उपयोग रसोई में तथा शुभ और मांगलिक कार्यों में होता आ रहा है। इसके अलावा औषधि के रूप में भी इसके लाभदायक असर को हमने जाना और पहचाना है। दूल्हे और दुल्हन को शादी के समय हल्दी लगाने का उद्देश्य और सन्देश यही होता है की हल्दी का उपयोग  सुंदरता और स्वास्थ्य दोनों दे सकता है। हल्दी लगाने के कारण ही शादी के समय दूल्हा और दुल्हन के चेहरे पर नूर दिखाई पड़ता है।

हल्दी अदरक की तरह एक जड़ होती है। इसका पौधा 5 -6 फुट तक होता है।

पौधे को 20 °-30 ° तापमान और भरपूर पानी चाहिए होता है।

हल्दी को सुखाकर फिर पीस कर रसोई में काम में लिया जाता है।

सुंदरता बढ़ाने और स्वास्थ्य लाभ के लिए भी पिसी हुई  Haldi  ही काम में ली जाती है।

हल्दी के कितने नाम:- सम्पूर्ण भारत में हल्दी का उपयोग होता है। अलग अलग भाषा और जगह पर इसे कई नामों से जाना जाता है। हिंदी में इसे हरिद्रा haridra , हरिता Harita ,  पितिका Pitika , गौरी Gauri और निशा Nisha भी कहते है। भारत के अलग अलग हिस्सो में इसे अलग नाम से जानते है। जानिए किस भाषा में हल्दी को क्या कहते है।

  • गुजराती         —  हल्दर
  • मराठी           —  हलद
  • बंगाली           —  हलुद
  • पंजाबी           —  हरदल
  • तेलगू             —  पसुपू
  • तमिल            —  माँजल
  • सिंधी             —  हल्दा
  • कन्नड़            —  अरिशिना
  • कश्मीरी         —  लिडार

हल्दी के लाभदायक तत्व और गुण:- हल्दी की तासीर गर्म होती है। यह कफ और वात मिटाती है तथा पित्त बढाती है। Haldi  में प्रोटीन , कार्बोहाइड्रेट , फाइबर , मैंगनीज ,पोटेशियम , कैल्शियम , फास्फोरस , आयरन , ज़िंक , कॉपर , ओमेगा -3 व ओमेगा -6 फैटी एसिड , विटामिन C  , B 6 , आदि पाए जाते है। 

हल्दी में करक्यूमिन नामक एक विशेष तत्व होता है जो इसे औषधीय गुण प्रदान करता है । यह तत्व एक ताकतवर एंटीऑक्सीडेंट तथा एंटी

इंफ्लेमेटरी होता है। करक्यूमिन आसानी से रक्त में अवशोषित नहीं होता लेकिन यदि काली मिर्च के साथ लिया जाये तो पिपराइन के कारण

इसका अवशोषण बढ़ सकता है। इसके अलावा करक्यूमिन वसा में घुलनशील होने के कारण वसायुक्त भोजन के साथ  Haldi  का उपयोग लाभदायक सिद्ध होता है।

हल्दी के दवा के रूप में बिना किसी साइड इफ़ेक्ट के कई अंग्रेजी दवाओं से बेहतर परिणाम सिद्ध हो चुके है। हल्दी के एंटीऑक्सीडेंट फ्री रेडिकल्स से रक्षा करते हुए उम्र के प्रभाव से व कई प्रकार की गंभीर बीमारियों से बचाते है । 

करक्यूमिन हमारे शरीर में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट एंजाइम की कार्यविधि को भी बढ़ाता है। इस प्रकार हल्दि का दुगना लाभ हमें मिलता है।

यह शरीर और दिमाग दोनों के लिए लाभदायक है। हल्दी के नियमित उपयोग से दिमाग में उम्र के साथ होने वाले परिवर्तन तथा दिमागी बीमारी जैसे-अवसाद, अल्जाइमर, याददाश्त कम होना आदि से बचाव हो सकता है।

हल्दी से घरेलु उपचार :-

एसिडिटी:- हल्दी और मुनक्का समान मात्रा में लेकर पीस लें। इसे दिन में तीन बार लेने से एसिडिटी में आराम मिलता है।

पीलिया:- दही में हल्दी मिलाकर खाने से पीलिया रोग में लाभ मिलता है।

दस्त:- छाछ में हल्दी मिलाकर पीने से दस्त ठीक हो जाते है।

बिवाई फटना:- हल्दी और पिसा हुआ कच्चा पपीता इन दोनों को मिलाकर सरसों के तेल में पका कर बिवाई पर लगाने से फटी बिवाई  ( फटी एड़ी ) ठीक हो जाती है।

फटे होंठ:- सरसों के तेल में हल्दी मिलाकर होंठ और नाभि में लगाने से होंठ फटने बंद हो जाते है।

दर्द:- एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दि मिलाकर पीने से शरीर में होने वाले अंदरूनी दर्द मिट जाते है। दूध में चीनी ना डालें।

टूटी हड्डी:- हड्डी टूटने पर जब तक प्लास्टर है आधा चम्मच हल्दि गर्म दूध में मिलाकर सुबह शाम पीने से हड्डी जल्दी और मजबूती से जुड़ती है तथा दर्द में भी आराम रहता है।

चोट की सूजन:- चोट या मोच के कारण  सूजन आने पर एक चम्मच हल्दि , एक चम्मच शहद और एक चम्मच चूना मिलाकर सुबह शाम लेप करने से दर्द मिट जाता है।

दाँत और मसूड़े:- सरसों के तेल में हल्दी और  सेंधा नमक मिलाकर हल्के हाथ से मसूड़ों की मालिश करने से दाँत में दर्द, गर्म ठंडा लगना, हिलना,मसूड़ों से खून आना आदि मिट जाते है।

घाव:- घाव पर पिसी हुई हल्दी छिड़क देने से घाव जल्दी भरता है। घाव में कीड़े हों तो वे नष्ट हो जाते है। हल्दी की गांठ पानी के साथ घिस कर यह लेप घाव पर लगाने से भी बहुत लाभ होता है।

रक्त शोधन:- आधा चम्मच हल्दी और एक चम्मच आंवले का चूर्ण मिलाकर गर्म पानी के साथ कुछ दिन लेने से खून साफ होता है। फोड़े फुंसी होना मिटता है।

गले में खराश:- एक गिलास गर्म पानी में दो चुटकी नमक , एक चुटकी हल्दि और तीन चार बूँद घी डालकर सुबह शाम पीने से गले की खराश ठीक होती है।

प्रमेह (वीर्य विकार):- दो चम्मच आंवले का रस , एक चम्मच शहद और दो चुटकी हल्दि मिलाकर रोजाना कुछ दिन लेने  से प्रमेह रोग (वीर्य विकार) ठीक होता है।

सर्दी जुकाम:- हल्दी और कालीमिर्च पिसी हुई एक गिलास गर्म दूध में या एक गिलास गर्म पानी में मिलाकर पीने से सर्दी जुकाम में आराम मिलता है।

फेस ग्लो:- दो चम्मच बेसन और आधा चम्मच हल्दि में दूध मिलाकर पेस्ट बना लें। इसे चेहरे पर लगा लें।  सूखने के बाद गुनगुने पानी से धो लें। कुछ ही दिनों में चेहरा निखर जायेगा।  Face Glow करने लगेगा।

हल्दी कब ना लें (हल्दी के नुक्सान) -

  • यदि आपको पित्ताशय में पथरी हो या किसी और प्रकार की पित्ताशय की समस्या हो तो दूध हल्दि ना लें। 
  • डायबिटीज हो तो हल्दि का उपयोग परामर्श के बाद ही करना चाहिए क्योकि इससे ब्लड शुगर प्रभावित हो सकती है।
  •  जिन लोगों का हीमोग्लोबिन बहुत कम है उन्हें हल्दी का उपयोग कम ही करना चाहिए।
  •  यदि आपने हाल ही में ऑपरेशन करवाया है या निकट समय में आपरेशन करवाना चाहते है तो हल्दी का उपयोग अधिक नहीं करना चाहिए। क्योकि हल्दी खून को पतला करती है और ब्लड क्लॉटिंग को धीमा कर देती है।
  •  हल्दी के अधिक उपयोग से शुक्राणु प्रभावित हो सकते है। यदि निकट समय में बच्चा पैदा करना चाहते है तो हल्दी कम ही लें

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